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धुनुची धूप जलाने का तरीका [Dhunuchi Dhoop jalane ka tarika]

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अगर आप घर पे रोज धूप करना चाहते हैं पर सही तरीके से कर नहीं पते हैं तो उनको आज हम बताएँगे कि  कैसे घर पे जलाते हैं धुनुची धूप| बहुत से लोग गे के गोबर के कंडे में धूप जलाते हैं पर अगर आप घर पे धुनुची धूप जला रहे हैं तो सबसे अच्छा होता है कि आप नारियल के खोल यानि छिलके से जलाय| यह बाजार में नारियल बेचने वाले के पाश मिल जाता है साथ ही कुछ पूजा सामग्री के दुकान में भी आप आर्डर देकर इसे खरीद सकते हैं| कुछ प्रदेशों में लोग पुरे नारियल को भी खरीदते हैं और घर पे उसे छील कर सही तरीके से काट के उससे फिर धूप जलने में इस्तेमाल करते हैं| धूप जलने के लिए तो जबसे पहले आप एक पीतल का धुनुची ले ले| बहुत से लोग मिटटी कि भी धुनुची इस्तेमाल करते हैं पूजा के लिए पर अगर आप धूप से आरती कर रहें हैं तो आपको पीतल का धुनुची ही लेना चाहिए| धुनुची को साफ करके ही आप पूजा या आरती के लिए इस्तेमाल करें| धुनुची लेने के बाद अब नारियल के छिलके को छोटे छोटे आकार में काट के या फिर छिलके के जो नरम भाग होता हैं उसे हात से अच्छी तरीके से शक्त खोल से अलग करके धुनुची में अच्छी तरह से रख ले| ऐसे रखें ताकि आपको जलाने में क...

गुग्गुल धूप [Guggul]

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गुग्गुल एक वृक्ष है| इससे मिलनेवाले राल जैसे पदार्थ को 'गुग्गल' कहा जाता है जिसे धुप करने में इस्तेमाल किया जाता है| अगर भारत की बात करें तो भारत में इस जाति के दो प्रकार के वृक्ष पाए जाते हैं| यह भारत के कर्नाटक, राजस्‍थान, गुजरात तथा मध्य प्रदेश राज्‍यों में उगता है। कुछ कुछ जगह से प्राप्त गुग्गुल का रंग पीलापन लिए श्वेत तथा अन्य कई जगह का गहरा लाल होता है| इसमें मीठी सी एक महक रहती है जिसको अग्नि में जलाने पर यह जगह सुंगध से भर जाता है| इसलिये इसे धूप के रूप में व्यव्हार किया जाता है|  अष्टांग से लेकर षोडशांग सारे धूप में ही आपको गुग्गुल के बारे में जानकारी मिलेगा| कहा जाता है धूना, गुग्गुल, कपूर एकसाथ जलाना धूप आरती के लिए सबसे उत्कृष्ट होता है| यह एक सुन्दर सी गंध आपके आसपास बना देती है और साथ ही बातावरण को शुद्ध कर देती है| आप जब भी धूप जलाय तब तब अपने घर के खिड़की और दरवाजे जरूर खुले हुए ही रखे इससे इसके धुआँ बाहर निकल जाएगी और साथ ही एक सुन्दर ही खुशबू आपके पूरी घर में रह जाती है| हो सके तो आप सुबह और शाम दोनों समय गुग्गुल से धूप करें और विशेष पूजा के दिन भी आरती...