राल/ धूना/ रेज़िन [Resin]

राल धूना ऐसे कई सारे नाम आपको मिलेंगे जो कि प्राकृतिक धूप का ही नाम है| इसे इंग्लिश में रेज़िन कहा जाता है| संस्कृत में इसे 'निर्यास' कहा गया है जो किसी पेड़ों के छाल से मिलनेवाला गोंद होता है| इसे प्राकृतिक धूप भी कहा जाता है जो धूप करने और आरती के समय जलाय जाते हैं| धुनुची में नारियल के छिलके, धूना, गुग्गुल के साथ जलाई जाती है| सरल के पेड़ों से भी धूना पाई जाती है साथ ही 'अराल' और 'द्रुमामय' भी रेज़िन के लिए प्रयोग होते हैं| पूजा के लिए शाल पेड़ का धूना ही जलाय जाते हैं ज्यादातर|

इसका उपयोग पुरे देश भर में किया जाता है पर यह बंगाल, बिहार और पूर्वी उत्तरप्रदेश में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है| अगर आप बंगाल, बिहार या उत्तरप्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र में जायेंगे तो वह के कोई भी पूजा हो उत्सव हो या फिर रोज की आरती हो उसमे आपको इसके इस्तेमाल जरूर दिखाई देंगे| दुर्गापूजा के समय यह खास कर इस्तेमाल किया जाता है जो कि एक बहुत ही विशेष आरती होती है और कुछ जगह पर धूना आरती नृत्य या धुनुची आरती नृत्य भी आयोजन किये जाते हैं जैसे गुजरात में गरबा नृत्य| यह दोनों भी माँ के लिए कि जाती है और नवरात्रि समय ही की जाती है| 

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

आगम और धूप दीप पूजा आरती

धूप नैवेद्य भोग अर्पण | Dhoopam Naivedyam

नैवेद्य और प्रसाद क्या होता है [Naivedya aur Prasda]