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धुनुची धूप जलाने का तरीका [Dhunuchi Dhoop jalane ka tarika]

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अगर आप घर पे रोज धूप करना चाहते हैं पर सही तरीके से कर नहीं पते हैं तो उनको आज हम बताएँगे कि  कैसे घर पे जलाते हैं धुनुची धूप| बहुत से लोग गे के गोबर के कंडे में धूप जलाते हैं पर अगर आप घर पे धुनुची धूप जला रहे हैं तो सबसे अच्छा होता है कि आप नारियल के खोल यानि छिलके से जलाय| यह बाजार में नारियल बेचने वाले के पाश मिल जाता है साथ ही कुछ पूजा सामग्री के दुकान में भी आप आर्डर देकर इसे खरीद सकते हैं| कुछ प्रदेशों में लोग पुरे नारियल को भी खरीदते हैं और घर पे उसे छील कर सही तरीके से काट के उससे फिर धूप जलने में इस्तेमाल करते हैं| धूप जलने के लिए तो जबसे पहले आप एक पीतल का धुनुची ले ले| बहुत से लोग मिटटी कि भी धुनुची इस्तेमाल करते हैं पूजा के लिए पर अगर आप धूप से आरती कर रहें हैं तो आपको पीतल का धुनुची ही लेना चाहिए| धुनुची को साफ करके ही आप पूजा या आरती के लिए इस्तेमाल करें| धुनुची लेने के बाद अब नारियल के छिलके को छोटे छोटे आकार में काट के या फिर छिलके के जो नरम भाग होता हैं उसे हात से अच्छी तरीके से शक्त खोल से अलग करके धुनुची में अच्छी तरह से रख ले| ऐसे रखें ताकि आपको जलाने में क...

कैसे करें गणेश जी की धूप सेवा [Ganesh Dhoop Aarti]

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अगर गणपति जी आपके घर बिराज रहे हैं तो उसके लिए उनके आप कुछ न कुछ करना ही चाहते हैं, पर आजकल हमारे पास समय के कमी के कारण हम बहुत कुछ कर नहीं पते हैं| पर ऐसे कई सारे सरल उपाय भी है जिसके माध्यम से हम गणेश जी की आरती और सेवा कर सकते हैं| आइये ऐसे ही एक सरल उपाय के बारे में जान लेते हैं| अगर आपके पास बहुत सारा समय भोग लगाने की या फिर बहुत समय बैठके पूजा करने के लिए नहीं है तो आप गणपति बाप्पा के धूप सेवा भी कर सकते हैं| इसके लिए आपको दोनों धुनुची धूप गणेश जी के सामने जलने चाहिए जिसमे एक गणेश जी के लिए होता है और दूसरा माँ गौरी के लिए| धुनुची को जमीं पे सिर्फ न रखे उसके लिए उसे अक्षत बिछाकर ही स्थापन करें और जल, गन्धपुष्प ततः अक्षत से अर्पण करें| "धूपघ्रायामि ॐ गं गणेशाय नमः" और "धूपघ्रायामि ॐ नमः गौरी देव्यै नमः" | इसे दिनमे टिंबर जरूर श्री गणेश जी को अर्पण करें और साथ ही धूप-डीप से आरती करें| धूप जलने के लिए नारियल छिलका, कपूर, धूना, गुग्गुल जरूर इस्तेमाल करें| गपति जी को एक नारियल अगर हो सके तो रोज चढ़ाय साथ ही उन्हें पैन करने के लिए पवित्र जल भी रोज लोटा में भर...

घर पे रोज कैसे करें संक्षिप्त आरती [Everyday Short Aarti]

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घर पे हम पूजा तो करते ही है पर रोज आरती नहीं कर पाते हैं सही तरह से और बस विशेष तिथि पर ही आरती करते हैं, इस तरह से पूजा तो हो जाती है पर आरती सही पूजा सम्पूर्ण मणि जाती है यहाँ तक कि अगर आप अलग से पूजा नहीं कर करते हो पर सिर्फ आरती करते हो तो भी आपकी पूजा सम्पूर्ण मानी जाती है| आरती ही मूल पूजा है|  घर पे संक्षिप्त आरती के लिए एक पीतल पंचप्रदीप ले ले और उसे घी या सरसो के तेल से कपास के सहायता से बाटी लगा दे| साथ ही धूप के लिए नारियल के छिलके, धूना और गुग्गुल ले ले| अगर आप संक्षिप्त पूजा कर रहे है तो आप बस फूल, चन्दन और अक्षत अर्पण कर दे और जल से अथवा गंध पुष्प से आरती के दिया और धूप को निवेदन कर दे| अगर आप कोई प्रसाद या मेवा निवेदन करना चाहते हैं तो आरती की पहले ही कर सकते हैं| घंटी और संख ध्वनि के साथ आरती करें और प्रणाम करें| अगर आप पंचप्रदीप इस्तेमाल नहीं भी कर पा रहे हैं तो आप एक दीपक भी जला सकते हैं पर धूप धुनुची वाली ही लेना चाहिए नाकि अगरबत्ती| आरती के बाद पुरे घर में धूप कर दे और आरती ग्रहण करें| संक्षिप्त आरती में किसी भी विशेष मांश की जरुरत नहीं है पर अगर आप कहें त...

बिना पूजा किये घर पे कैसे करें धूप [Bina Puja ke ghar pe karen Dhoop]

आजकल हम एक ब्यस्त जीवन के अधीन हो चुके हैं इसलिए हर समय घर पे मंदिर रखना और नित्य पूजा करना हमारे लिए संभव नहीं होता है| पर बहुत से लोग है जो घर पे पूजा करना चाहता है पर मंदिर न होने की कारण वो पूजा नहीं कर पाते हैं| यहाँ पर एक विषय आपको जानकारी में रखना जरुरी है कि बिना पूजा किये भी आप घर पे आरती या धूप कर सकते हैं| बहुत से लोग जो आजकल नौकरी या फिर किसी पढ़ाई के लिए बाहर रहते हैं पर उन्हें पूजा करने की मन होती है वो भी घर पे बिना मंदिर स्थापना किये ही आरती और धूप कर सकते हैं| आइये जान ले इस बारे में| अगर आप घर पे सिर्फ धूप और आरती यानि दिया करना चाहते हैं तो आपको अलग से मंदिर रखने की जरुरत नहीं है आप अपने पसंदीदा भगवान के बस एक छवि ही रख सकते हैं| बहुत से लोग अपने घर पे अगरबत्ती जलाते हैं पर यह धूप करना नहीं होता है, धूप करने के लिए धुनुची धूप ही इस्तेमाल करना होता है जो राल, गुगुल, कपूर से जलाई  जाती है| इसे ही धूप देने के लिए इस्तेमाल करें| सबसे पहल आप  स्नान कर ले और फिर अगर संभव हो सके तो भगवान के फोटो के सामने एक गंधपुष्प अर्पण कर दे| उसके बाद धूप जला ले और भगवान से धू...

श्रीकृष्ण और राधारानी की धूप सेवा आरती कैसे करें [Dhoop Aarti of Lord Krishna and Radharani]

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कृष्ण पूजन हो या फिर कोई भी पूजा उसके लिए धूप सेवा और आरती बहुत ही खास होती है | पर बहुत से लोग इस बारे में उतना नहीं जनताए इसलिए इसे पूजा पद्धति के रूप में कर नहीं पते हैं | आज हमारे पास समय बहुत ही कम है जिस कारण बहुत से सामग्री से पूजा आरती करना बहुत मुशकिल हो गया है , पर ऐसे कई सारे तरीके और पद्धति हैं जिसके जरिये आप सरल और आसान तरीके से ही आरती कर सकते हैं और यह सम्पूर्ण पूजा भी होती है | धूप सेवा आरती भी ठीक ऐसी ही एक पूजा पद्धति है | अगर आप जन्माष्टमी के दिन धूप सेवा आरती कर रहें हैं तो उसके लिए दो धूपपात्र या धुनुची ले ले और अगर आप रोज की पूजा में श्री राधा कृष्ण के धूप सेवा आरती करना चाहते हैं तो उसके लिए आप एक ही धुनुची में धूप जला सकते हैं | धूप आरती के लिए बहुत से सामग्री की जरुरत नहीं होती है बस धूप यानि धूना , गुग्गुल और कपूर ले ले साथ आरती दीपक जलने के लिए घी या तिल के तेल | श्री कृष्ण और राधारानी को चढ़ाने के लिए फूल , चन्दन और तुलसी , अक्षत | अगर आप जन्मास्टमी के दिन यह पूजा कर रहे हैं तो शाम के समय कीजिये और अगर आम दिनों में ही कर रहे हैं तो दिन में दोबार यानि...

गुग्गुल धूप [Guggul]

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गुग्गुल एक वृक्ष है| इससे मिलनेवाले राल जैसे पदार्थ को 'गुग्गल' कहा जाता है जिसे धुप करने में इस्तेमाल किया जाता है| अगर भारत की बात करें तो भारत में इस जाति के दो प्रकार के वृक्ष पाए जाते हैं| यह भारत के कर्नाटक, राजस्‍थान, गुजरात तथा मध्य प्रदेश राज्‍यों में उगता है। कुछ कुछ जगह से प्राप्त गुग्गुल का रंग पीलापन लिए श्वेत तथा अन्य कई जगह का गहरा लाल होता है| इसमें मीठी सी एक महक रहती है जिसको अग्नि में जलाने पर यह जगह सुंगध से भर जाता है| इसलिये इसे धूप के रूप में व्यव्हार किया जाता है|  अष्टांग से लेकर षोडशांग सारे धूप में ही आपको गुग्गुल के बारे में जानकारी मिलेगा| कहा जाता है धूना, गुग्गुल, कपूर एकसाथ जलाना धूप आरती के लिए सबसे उत्कृष्ट होता है| यह एक सुन्दर सी गंध आपके आसपास बना देती है और साथ ही बातावरण को शुद्ध कर देती है| आप जब भी धूप जलाय तब तब अपने घर के खिड़की और दरवाजे जरूर खुले हुए ही रखे इससे इसके धुआँ बाहर निकल जाएगी और साथ ही एक सुन्दर ही खुशबू आपके पूरी घर में रह जाती है| हो सके तो आप सुबह और शाम दोनों समय गुग्गुल से धूप करें और विशेष पूजा के दिन भी आरती...

राल/ धूना/ रेज़िन [Resin]

राल धूना ऐसे कई सारे नाम आपको मिलेंगे जो कि प्राकृतिक धूप का ही नाम है| इसे इंग्लिश में रेज़िन कहा जाता है| संस्कृत में इसे 'निर्यास' कहा गया है जो किसी पेड़ों के छाल से मिलनेवाला गोंद होता है| इसे प्राकृतिक धूप भी कहा जाता है जो धूप करने और आरती के समय जलाय जाते हैं| धुनुची में नारियल के छिलके, धूना, गुग्गुल के साथ जलाई जाती है| सरल के पेड़ों से भी धूना पाई जाती है साथ ही 'अराल' और 'द्रुमामय' भी रेज़िन के लिए प्रयोग होते हैं| पूजा के लिए शाल पेड़ का धूना ही जलाय जाते हैं ज्यादातर| इसका उपयोग पुरे देश भर में किया जाता है पर यह बंगाल, बिहार और पूर्वी उत्तरप्रदेश में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है| अगर आप बंगाल, बिहार या उत्तरप्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र में जायेंगे तो वह के कोई भी पूजा हो उत्सव हो या फिर रोज की आरती हो उसमे आपको इसके इस्तेमाल जरूर दिखाई देंगे| दुर्गापूजा के समय यह खास कर इस्तेमाल किया जाता है जो कि एक बहुत ही विशेष आरती होती है और कुछ जगह पर धूना आरती नृत्य या धुनुची आरती नृत्य भी आयोजन किये जाते हैं जैसे गुजरात में गरबा नृत्य| यह दोनों भी माँ ...