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गणेश विसर्जन आरती [Ganesh Visarjan]

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वैसे तो गणपति बाप्पा हर समय हमारे साथ ही रहते हैं पर  अगर आप मूर्ति में उनको स्थापित करके पूजा कर रहे हैं गणेश उत्सव के समय तो उनका विसर्जन करना भी एक नियम है| पर विसर्जन से पहले भी बाप्पा की आरती करनी होती है और उनसे दोबारा प्रदाहरणे के लिए अनुरोध किया जाता है, ताकि बाप्पा अगले साल फिरसे ए और बहुत सी खुशिया हमारे घर लेकर आए| बहुत से लोग तीन दिन तक ही गणपति अपने घर पे रखते हैं और फिर विसर्जन करते हैं पर कुछ जगह पर सात या दस दिन भी गणपति रखी जाती है| गणपति विसर्जन के लिए आपको सबसे पहले घरपे ही गणपति जी के एकबार आरती करनी चाहिए और साथ ही एक नारियल उन्हें अर्पण करना चाहिए| आरती में धूप और पंचप्रदीप घी या तेल से जलाकर ही करें आप कहें तो कपूर से भी आरती कर सकते हैं| इसके बाद आप गणपति जी को अगले बार आने के अनुरोध करें उनके कान में और साथ ही अगर आप कुछ उनसे मांगना या कहना चाहते हैं तो उनके कान में ही बोल दीजिये| इसके बाद उनसे क्षमा याचना करें की 'हे गणपति बाप्पा हमने आपकी समर्थ औसर पूजा करने की कोशिश की पर अगर कोई त्रुटि या दोष रह गई है तो उसके लिए हमे क्षमा करें और अगले साल अहम्रे ...

गणपति बाप्पा की संध्या आरती करें इस तरह से [ Ganesh Ji ki Aarti]

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गणपति बाप्पा अब आपके घर में बिराजमान हैं और आप उन्हें अपने घर के सदस्य की तरह ही आपको यतन करना होगा, उसके लिए आप जो भी घर पे बने वो बाप्पा के लिए ही बना रहे हैं उसी हिसाब से खाना बनाय और साथ ही उसे बाप्पा को भोग में चढ़ाय अगर आप खाना बनाकर नहीं अर्पण कर सकते तो कोई परेशानी नहीं है आप एक नारियल और गुड़ या मिसरीके सरबर बाप्पा को देते रहे और साथ में एक लोटा जल भी जरूर रख दे| गणपति बाप्पा जब आपके घर में बिराजते हैं तो रोज सुबह शाम आरती जरूर करें| सुबह जब आप आरती करें तो शंख नाद के साथ बाप्पा को जगाय और घंटी बजाते हुए धूप-दीप अथवा कपूर से आरती करें| संध्या के समय भी आप आरती जरूर करें| सबसे पहले गणपति बाप्पा के दोनो तरफ अक्षत रखदे और उसके ऊपर दिया स्थापन करके दीपक जला दे| संभव हो तो अक्षत बिछाकर उसपे दोनों तरफ आप  दो धुनुची भी रख दे| गणेश जी के साथ माँ गौरी भी हमारे घर में बिराजमान होती है इसलिए एक धूप गणेश जी के नाम और एक धूप माँ गौरी के नाम पर स्थापन करें| इसके बाद अगर आपके पास इक्कीस  दीपदान है जिसमे आप दीपक जलाके आरती कर सकते हैं या फिर आप केवल पंचप्रदीप से भी आरती कर सकते ह...

कैसे करें घर पे ही सरल गणेश पूजा आरती [Saral Ganpati pujan vidhi]

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श्री गणेश गणों के ईश है अर्थात सबसे ईश्वर, इसलिए उन्हें अपने घर का सदस्य और अपने बंधू दोस्त मानकर ही पूजा आरती करें| गणपति बाप्पा प्यार भावना के भूखे है नाकि सिर्फ सामग्री और उपचार के| बस इस बात का ध्यान रखे कि अगर आप अपने घर पे श्री गणेश की स्थापना करते हैं तो दिन में टिंबर आरती जरूर करें और पुरे घर में भी धूप जरूर करें साथ ही अगर आप अखंड दीपक न भी जला पाए तो घर के बत्ती को न बुझाय| गणपति बाप्पा के लिए मंदिर या चौकी के पास एक गिलास या लोटा में पानी भरके जरूर रख दे|  अगर आप धातु के गणेश मूर्ति की पूजा कर रहे हैं तो उसे सबसे पहले कच्चे हल्दी से नहलाए और पंचामृत  से अभिषेक जरूर कर ले| अगर आप मिटटी की मूर्ति में ही गणपति आराधना कर रहे हैं तो उसके लिए आप किसी सुपारी को भगवान की मूर्ति मानकर उनकी अभिषेक कर सकते हैं| नहलाने के बाद गणेश जी को एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर उन्हें बैठा दे और अच्छे से फूल माला से सजा जरूर दे| इसके बाद बाप्पा के दोनों तरफ पीतल या चांदी के दो दीपक जला दे जिसे आप तेल से ही जलाय जिनमें सबसे अच्छा होगा नारियल तेल का इस्तेमाल करना| अगर आप कहें तो दोनों तरफ...

गणेश पूजा के भोग में तुलसी नहीं दूर्वा डालकर अर्पण करें [Ganesh Puja Tulsi ke bina]

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किसी भी पूजा में भोग लगाते समय तुलसी डालना अनिवार्य होता है पर गणेश पूजन में तुलसी नहीं डाली जाती है उसके बदले आप उसमे दूर्वा डालकर भोग निवेदन कर सकते हैं| गणेशजी को आरती करने के लिए पुष्पांजलि देने के लिए जवाकुसुम, दूर्वा, अक्षत अर्पण करें| आप गणपति को बहुत सरे फूल से भी सजा सकते हैं पर उन्हें जवा पुष्प सबसे प्रिय है, लाल रंग के किसी भी प्रकार के फूल, बेलपत्ता, दूर्वा जरूर चढ़ाय और वह माला बनाकर भी पहना सकते हैं| रोज नै और ताजे माला ही पहनाय नाकि पहले दिन पहनाई माला ही आप विसर्जन तक ही रख दे| कोशिश करें की घर के गमले में उगी हुई जावा पुष्प से आप पूजा करें और अगर आपके बगीचे में दूर्वा है तो उसी से पूजा करें| आजकल बाजार में बनी बनाय दूर्वा और फूल की माला मिल जाती है पर अगर आप अपने घर में ही होनेवाले फूल या दूर्वा भगवन को अर्पण करेंगे तो बहुत ही अच्छा होगा| एक बात का खास ध्यान रखे कि गणेश पूजन में तुलसी कभी भी इस्तेमाल न करें| फूलों के साथ गणेश जी को लाल चन्दन जिसे रक्त चन्दन भी कहते हैं उसे ही अर्पण करें|