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मंगल धूप करने के बारे में जाने कुछ बातें [Mangal Dhoop Karna]

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मंगल धूप किसे कहते है सबसे पहले इस बारे में थोड़ी सी बात करना जरुरी है | मंगल यानि कोई भी कार्य शुरू करने से पहले जो भी मंगल प्रार्थना के साथ कार्य किया जाता है उसे कहते हैं | मंगल धूप भी मंगल आरती की तरह ही किया जाता है पूजा शुरू से पहेल या फिर मंगल मुहूर्त में| पर मंगल धूप जलाते समय एक बात का ध्यान रखना जरुरी है कि मंगल धूप कभी भी अगरबत्ती से जलानी नहीं चाहिये क्यों कि वह कृत्रिम धूप होता है जो की शारीर के लिए बहुत जी ज्यादा हानिकारक मन जाता है| इसलिए अगर आप धूप जला रहे हैं तो इस बात का ध्यान रखना बहुत ही जरुरी है कि हमेशा धुनुची धूप में ही धूप करना चाहिये| यहाँ पर भी एक बात समझने की जरुरत है कि घर पे पूजा के लिए जब हम धुनुची जला रहे हैं तो उसे हमेशा ही पीतल धातु से बना होना चाहिये, क्यों कि पीतल धातु ही पूजा के लिए सबसे उत्कृष्ट और सही माना जाता है| मंगल धूप के लिए नारियल के खोल में धूना, गुग्गुल और घी से जलाना बहुत ही सुभ होता है| कहते है गुग्गुल और घी से अगर मंगल धूप जलाई जाती है तो वह सकारात्मक उर्जा घर में भर देती है जिससे किसी भी कम और पढाई में घर के लोगों का मन में उत्सा...

कैसे करें मंगलवार के दिन हनुमान जी की आरती [ Tuseday Hanumanji Aarti ]

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सबसे पहले तो यह जानना बहुत ही जरुरी है जी अगर आप मंगलवार के दिन हनुमानजी की पूजा या आरती करते हैं तो आपको श्री रामजी की पूजा भी करना ही चाहिए तभी हनुमानजी की पूजा और आरती संपन्न होती है| हनुमान जी को सिंदूर बहुत ही प्रिय है इसलिए उनके पूजा में सिंदूर जरूर इस्तेमाल करें और साथ में अगर आप भोग के रूप में कुछ चढ़ाना चाहते हैं तो उसमे फल ही भगवान को भोग के रूप में चढ़ाय| अगर आपके घर श्री राम, सीताजी और हनुमानजी की मूर्ति पहले से ही स्थापित है तो आप वही पूजा करले और आरती भी करें पर अगर आपके घर मूर्ति स्थापित नहीं है तो आप एक चौकि पर श्री रामजी के सतह हनुमानजी की फोटो ले लें और फूल, माला, चन्दन से उनका श्रृंगार करें| पहले श्री रामजी और सीता माता को अक्षत, पुष्प और चन्दन चढ़ाय फिर हनुमानजी को| अब धूप और दीप निवेदन करें| और फिर अगर अब फल या मिठाई भोग लगा रहें हे तो वो भी चढ़ाय| उसके बाद धुनुची और सरसो तेल के पंचप्रदीप लेकर आरती करें| अब एक थाली में सिंदूर, चन्दन और तुलसी रखकर वहा आरती के धूप-दीप रखें और फिर सबको प्रसाद के रूप में आरती दे| आरती के धूप पुरे घर पे भी दिखा दे| आरती करते समय शंखनाद ...

सावन में महादेव और माता पार्वती की करें धूप आरती [ Shiv Parvati Dhoop Aarti ]

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कहते हैं धूप सबसे शुद्ध और सही उपकरण होता है पूजा के लिए| इसलिए अगर आप कभी भी पूजा करें तो धूप जरूर करें और साथ में धूप आरती भी करें| धूप से आरती करने के बाद ही हमेशा घी के पंचप्रदीप जलाकर आरती करें| आरती एक ऐसी प्रक्रिया है जो कोई भी कर सकता है उसके लिए कोई मंत्र या दीक्षा की जरुरत नहीं होती है| सावन में कई तरह के शिव पूजा विधि प्रचलित है और बहुत से भक्त मंदिर में जाकर भी जलाभिषेक करते हैं| पर हर किसी के लिए यह संभव नहीं होता है वो भी भगवन शिव और माता पार्वती की धूप आरती करके उनके आशीर्वाद पा सकते हैं| कहते हैं भगवन शिव आशुतोष हैं इसलिए उन्हें कुछ भी चढ़ाने से वह प्रसन्न हो जाते हैं| धूप का मतलब होता हैं हमारे सारे अहंकार, लोभ, कर्म, अकर्म शुद्ध अग्नि में विसर्जित करके अपने अपने आपको वैराग्य भावना से पवित्र करता, जैसे धूप जलकर ही सुगन्धित करता है| धूप एक निराकार वस्तु का प्रतीक भी हैं जो यह सन्देश देता हैं ही दुनियामे हर भौतिक वस्तु नश्वर है| धूप आरती के लिए सबसे पहले भगवन भोलेनाथ और माता पार्वती की फोटो स्थापना करें और दो धुनुची प्रस्तुत करें एक विश्वनाथ के लिए और एक अन्नपूर्णा ...