संदेश

#Aarti लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

रोज घर पे भोग और आरती कैसे करें? [Roj ghar pe bhog aarti kayse karen]

चित्र
घर पे वैसे तो हम रोज पूजा करते ही है पर कुछ लोग चाहती है कि वो भगवान को भोग लगाए और साथ ही भोग आरती भी करें| पर उन्हें यह समझ में नहीं आता है कि कैसे भगवान को भोग लगाए और कैसे आरती करें| सबसे पहले यह बात बता देना जरुरी है कि भोग का मतलब पकाया हुआ खाना ही समझते हैं हम पर आप चाहे तो कच्चा भोग भी चढ़ा सकते हैं अगर आपके घर पे अलग से रसोई या भोग बनाने के लिए बर्तन नहीं है तो| सबसे पहले आप यह समझ ले कि आप भोग में क्या चढ़ाना चाहते हैं, अगर आप एक खाना रोज नहीं खा सकते तो भगवान को भी रोज एक ही खाना चढ़ाना सही नहीं होता है| भोग देना कोई विशेष जरुरी है ऐसा तो नहीं है पर यह भक्त और भगवान के बिच एक भावना होती है कि हम भगवान को भोग लगाकर ही खाना खाते हैं दिन में एकबार ही सही| ज्यादातर हम दोपहर के समय भोग लगाते हैं| पर कुछ लोग जो भोग नहीं लगा पता है समय के या साधन के कारण जो खासकर कामकाजी और फ्लैट में रहते हैं जहा अलग से भोग बनाना मुश्किल होता है, वह भोग में चना, बतासा, मिसरी या शरबत भी चढ़ा सकते है| या फिर फल काटकर भी फल भोग लगाया जा सकता है| भोग अगर आप बना रहें है तो ध्यान में रखें कि पीतल के बर...

धुनुची धूप जलाने का तरीका [Dhunuchi Dhoop jalane ka tarika]

चित्र
अगर आप घर पे रोज धूप करना चाहते हैं पर सही तरीके से कर नहीं पते हैं तो उनको आज हम बताएँगे कि  कैसे घर पे जलाते हैं धुनुची धूप| बहुत से लोग गे के गोबर के कंडे में धूप जलाते हैं पर अगर आप घर पे धुनुची धूप जला रहे हैं तो सबसे अच्छा होता है कि आप नारियल के खोल यानि छिलके से जलाय| यह बाजार में नारियल बेचने वाले के पाश मिल जाता है साथ ही कुछ पूजा सामग्री के दुकान में भी आप आर्डर देकर इसे खरीद सकते हैं| कुछ प्रदेशों में लोग पुरे नारियल को भी खरीदते हैं और घर पे उसे छील कर सही तरीके से काट के उससे फिर धूप जलने में इस्तेमाल करते हैं| धूप जलने के लिए तो जबसे पहले आप एक पीतल का धुनुची ले ले| बहुत से लोग मिटटी कि भी धुनुची इस्तेमाल करते हैं पूजा के लिए पर अगर आप धूप से आरती कर रहें हैं तो आपको पीतल का धुनुची ही लेना चाहिए| धुनुची को साफ करके ही आप पूजा या आरती के लिए इस्तेमाल करें| धुनुची लेने के बाद अब नारियल के छिलके को छोटे छोटे आकार में काट के या फिर छिलके के जो नरम भाग होता हैं उसे हात से अच्छी तरीके से शक्त खोल से अलग करके धुनुची में अच्छी तरह से रख ले| ऐसे रखें ताकि आपको जलाने में क...

कैसे करें गणेश जी की धूप सेवा [Ganesh Dhoop Aarti]

चित्र
अगर गणपति जी आपके घर बिराज रहे हैं तो उसके लिए उनके आप कुछ न कुछ करना ही चाहते हैं, पर आजकल हमारे पास समय के कमी के कारण हम बहुत कुछ कर नहीं पते हैं| पर ऐसे कई सारे सरल उपाय भी है जिसके माध्यम से हम गणेश जी की आरती और सेवा कर सकते हैं| आइये ऐसे ही एक सरल उपाय के बारे में जान लेते हैं| अगर आपके पास बहुत सारा समय भोग लगाने की या फिर बहुत समय बैठके पूजा करने के लिए नहीं है तो आप गणपति बाप्पा के धूप सेवा भी कर सकते हैं| इसके लिए आपको दोनों धुनुची धूप गणेश जी के सामने जलने चाहिए जिसमे एक गणेश जी के लिए होता है और दूसरा माँ गौरी के लिए| धुनुची को जमीं पे सिर्फ न रखे उसके लिए उसे अक्षत बिछाकर ही स्थापन करें और जल, गन्धपुष्प ततः अक्षत से अर्पण करें| "धूपघ्रायामि ॐ गं गणेशाय नमः" और "धूपघ्रायामि ॐ नमः गौरी देव्यै नमः" | इसे दिनमे टिंबर जरूर श्री गणेश जी को अर्पण करें और साथ ही धूप-डीप से आरती करें| धूप जलने के लिए नारियल छिलका, कपूर, धूना, गुग्गुल जरूर इस्तेमाल करें| गपति जी को एक नारियल अगर हो सके तो रोज चढ़ाय साथ ही उन्हें पैन करने के लिए पवित्र जल भी रोज लोटा में भर...

गणेश आरती संगीत [Ganesh Aarti Song]

1. हिंदी गणेश आरती  जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥ एकदन्त दयावन्त चारभुजाधारी माथे पर तिलक सोहे मूसे की सवारी। पान चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा लड्डुअन का भोग लगे सन्त करें सेवा॥ जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥ अन्धे को आँख देत, कोढ़िन को काया। बाँझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ।। 'सूर' श्याम शरण आए सफल कीजे सेवा माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥ जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥ 2. मराठी गणेश आरती  सुखकर्ता दुखहर्ता वार्ता विघ्नाची। नुरवी पुरवी प्रेम कृपा जयाची। सर्वांगी सुंदर उटी शेंदुराची। कंठी झळके माळ मुक्ताफळांची॥ जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती। दर्शनमात्रे मन कामनांपुरती॥ जय देव रत्नखचित फरा तूज गौरीकुमरा। चंदनाची उटी कुंकुमकेशरा। हिरेजड़ित मुकुट शोभतो बरा। रुणझुणती नूपुरे चरणी घागरीया॥ जय देव लंबोदर पीतांबर फणीवर बंधना। सरळ सोंड वक्रतुण्ड त्रिनयना। दास रामाचा वाट पाहे सदना। संकष्टी पावावें, निर्वाणी रक्षावे, सुरवरवंदना॥ जय देव ...

घर पे रोज कैसे करें संक्षिप्त आरती [Everyday Short Aarti]

चित्र
घर पे हम पूजा तो करते ही है पर रोज आरती नहीं कर पाते हैं सही तरह से और बस विशेष तिथि पर ही आरती करते हैं, इस तरह से पूजा तो हो जाती है पर आरती सही पूजा सम्पूर्ण मणि जाती है यहाँ तक कि अगर आप अलग से पूजा नहीं कर करते हो पर सिर्फ आरती करते हो तो भी आपकी पूजा सम्पूर्ण मानी जाती है| आरती ही मूल पूजा है|  घर पे संक्षिप्त आरती के लिए एक पीतल पंचप्रदीप ले ले और उसे घी या सरसो के तेल से कपास के सहायता से बाटी लगा दे| साथ ही धूप के लिए नारियल के छिलके, धूना और गुग्गुल ले ले| अगर आप संक्षिप्त पूजा कर रहे है तो आप बस फूल, चन्दन और अक्षत अर्पण कर दे और जल से अथवा गंध पुष्प से आरती के दिया और धूप को निवेदन कर दे| अगर आप कोई प्रसाद या मेवा निवेदन करना चाहते हैं तो आरती की पहले ही कर सकते हैं| घंटी और संख ध्वनि के साथ आरती करें और प्रणाम करें| अगर आप पंचप्रदीप इस्तेमाल नहीं भी कर पा रहे हैं तो आप एक दीपक भी जला सकते हैं पर धूप धुनुची वाली ही लेना चाहिए नाकि अगरबत्ती| आरती के बाद पुरे घर में धूप कर दे और आरती ग्रहण करें| संक्षिप्त आरती में किसी भी विशेष मांश की जरुरत नहीं है पर अगर आप कहें त...

जन्माष्टमी विशेष: बांके बिहारी आरती, वृन्दावन [Banke Bihariji ki Aarti]

चित्र
कहते हैं बांके बिहारी लाल प्रेम की प्रतिमूर्ति हैं जिसने भी उनको एकबार देख लिया वह उनके मोह में मोह ही जाते हैं| इसलिए तो ठाकुरजी के दर्शन के समय पर्दा गिराकर दर्शन करवाई जाती है ताकि उनसे कोई मह न लगा बैठे और वह उस भक्त के प्रेम के साथ ही न चले जाये| अगर आप कभी वृन्दावन गए हैं और बांके बिहारी लाल की दर्शन की है तो आपको पता चलेगा कि क्या होता हैं उनके आरती के रंग| बांके बिहारी  मंदिर की सबसे खास बट यही है कि आरती के समय कोई शंख या घंटा ध्वनि वह नहीं कि जाती हैं केवल राधा नाम के साथ ही आरती की जाती है|  सुबह मंगल आरती के बाद आठ बजे मंदिर खोजी जाती हैं और इस समय बांके बिहारी लाल की श्रृंगार आरती होती है| इसके बाद दोपहर १२ बजे राजभोग लगाकर की जाती है बांके बिहारी लाल की भोग आरती| इसके कुछ देर बाद लल्ला को बिश्राम करने के लिए मंदिर बंद कर दिया जाता है और संध्या कालीन दर्शन के लिए शाम ५ बजे से रत के नौ बजे तक मंदिर खुले रहते हैं| इस दौरान ठाकुरजी की संध्या आरती की जाती है और मंदिर बंद होने के समय की जाती है शयन आरती|  जन्माष्टमी पर बांके बिहारी मंदिर में एकबार ही ज...

श्री कृष्ण मुरारी की आरती संगीत [ShreeKrishna Aarti Song]

आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥ आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥ गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला। श्रवण में कुण्डल झलकाला, नंद के आनंद नंदलाला। गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली। लतन में ठाढ़े बनमाली भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक, चंद्र सी झलक ललित छवि श्यामा प्यारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥ ॥ आरती कुंजबिहारी की॥ कनकमय मोर मुकुट बिलसै, देवता दरसन को तरसैं। गगन सों सुमन रासि बरसै। बजे मुरचंग, मधुर मिरदंग, ग्वालिन संग अतुल रति गोप कुमारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥ ॥ आरती कुंजबिहारी की॥ जहां ते प्रकट भई गंगा, सकल मन हारिणि श्री गंगा। स्मरन ते होत मोह भंगा बसी शिव सीस, जटा के बीच, हरै अघ कीच, चरन छवि श्रीबनवारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥ ॥ आरती कुंजबिहारी की॥ चमकती उज्ज्वल तट रेनू, बज रही वृंदावन बेनू। चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू हंसत मृदु मंद,चांदनी चंद, कटत भव फंद टेर सुन दीन दुखारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥ ॥ आरती कुंजबिहारी की॥ आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥

पंचप्रदीप/आरती दिया [panchapredeep]

चित्र
पंचप्रदीप आरती के लिए इस्तेमाल होने वाले मुख्य पात्र है जिसे आरती दिया भी कहा जाता है, जो घी या तेल की बाती लगाकर जलाई जाती है| यह पीतल और चांदी के बने हुए होते हैं पर और पांच, सात, इक्कीस, अट्ठाइस या इक्यावन बातीवाले होते हैं| जैसे बनारस में आरती के लिए जो दीपका इस्तेमाल किये जाते हैं वो इक्यावन बाती के ही होते हैं| पर घर के आरती के लिए हम पांच दीपक के पंचप्रदीप ही इस्तेमाल करते हैं| बहुत से लोग मिटटी के दीपक से भी आरती करते हैं या फिर पंचमुखी पीतल के दीप थालीपर रखकर जलाई जाती है और आरती की जाती हैं| अगर कोई इस तरह से आरती के दीपक इस्तेमाल करना चाहे तो भी कर सकता है उस में कोई समस्या तो नहीं है पर आजकल बाजार में कई तरह के अच्छे पीतल और काठ के हैंडल वाले पंचप्रदीप मिल जाते हैं और ऑनलाइन शॉप में भी उपलब्ध है अभी तो| इसलिए अगर आप आरती के लिए पंचप्रदीप लेंगे तो यह हैंडल वाले पांच या सात दीपकापवाले आरती दिया ही ले| बहुत से एक दीपक भी बाजार में आपको मिल जायेगा जो ही आरती के लिए ही हैंडलवाले एक दीपक है| पर अगर आप आरती दीपक खरीदेंगे ही तो आपको पांच बत्तीवाले दीपक ही लेना चाहिए| यह आरती के...

आरती में इस्तेमाल होनेवाले कुछ पात्र [Some vessel for aarti]

चित्र
वैसे तो आरती के लिए सबसे ज्यादा जरुरी होता है धूप और दीप पात्र| जिसे धुनुची और पंचप्रदीप भी कहते हैं| पर अगर आप सही से आरती करना कहते हैं पुरे विधि विधान के साथ तो कुछ और पात्र भी जरुरी होता है| जरुरी नहीं कि इनमे से सारे पात्र आप उपयोग करे पर अगर आप किसी अनुष्ठानिक पूजा कर रहे हैं तो आपके पूजा को सुन्दर बनाने के लिए यह सारे चीजें बहुत ही जरुरी है| आइये जान ले आरती के ऐसे हे इस्तेमाल होनेवाले पात्र के बारे में| १. धुनुची/धूपदान :- धुनुची जिसे धूपदान भी कहना जाता है आरती में धूप जलने और साथ ही धूप आरती करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है| यह पीतल के ही होते हैं ज्यादातर पर कुछ जगह चांदी के धुनुची भी इस्तेमाल किये जाते हैं आरती के लिए पर पीतल के धुनुची को सबसे सही और उत्तम माना गया है आरती के लिए| २. पंचप्रदीप :- आरती के लिए कम से कम पांच बत्ती या फिर सात बत्ती दीपदान होना जरुरी ही होती है| ज्यादातर बाजार में मिलनेवाले आरती दीपदान पांचबत्ती वाले पंचप्रदीप ही है| अगर आप किसी बड़े आयोजन में आरती करना चाहते हैं तो आप इक्कीस दीपक वाले दीपदान भी ले सकते हैं| यह पीतल चांदी और ताम्ब...

अट्ठाइस दीपक जलाकर करें शिवजी और माता पार्वती की आरती पूजा [Monday puja with 28 diyas]

चित्र
सावन के आखरी सोमवार वैसे तो आप हर दिन की तरह ही शिवपूजा कर सकते हैं, जिसमे जलाभिषेक, पुष्प, चन्दन, धूप, दीप और साथ में कुछ प्रसाद के रूप में चढ़ा सकते हैं| पर अगर अपने पुरे सावन सोमवार की पूजा सम्पूर्ण निष्ठा से सम्पूर्ण की  हैं तो आखरी सोमवार को १०८ या २८ दीपक जलाकर आरती जरूर करें| किस तरह से करें यह पूजा आरती निचे जाने विस्तार से| एक बार ध्यान रखें की दीपक आप संध्या आरती के समय ही जलाय सुबह के समय सामान्य पूजा ही करें| शिवपूजा रात्रि में ज्यादा फलदायी कहाँ गया है इसलिए संध्या पूजन तथा आरती के समय ही दीपमालाय जलाय| संध्या के समय धूप से अर्चन करें पहले और फिर बिल्वपत्र और सचन्दन पुष्प से पुष्पांजलि प्रदान करें| अब आरती के पात्र में धूप और पांच बाती जलाकर उसे श्री विश्वनाथ और माता पार्वती को निवेदन कर ले| और उसके साथ ही १०८, २८ या कम से कम २१ मिटटी के दीपक जलाकर उसे निवेदन करते हुए कहें "एष अष्टबिंशति ( २८)  दीपमालाय ॐ शिवाय नमः" | इसी तरह माँ गौरी को भी दीपमालाय निवेदन करें| इसके बाद धूप से और फिर पंचप्रदीप से निवेदन करें| अगर आप दीपमालाय घी से जला पाए तो बहुत ही अच्छा ...

भारत के कुछ प्रसिद्ध आरती जो दुनिया भर में जाने जाते हैं [Some famous Aarti of India list]

वैसे तो भारत में हर मंदिर घर पे आरती की एक सुन्दर परंपरा है पर ऐसे कुछ आरती है जिन्हे देखने सिर्फ देश भर से ही नहीं विदेश से भी लोग आते रहते हैं| आइये ऐसे ही कुछ आरती के सूची जानते हैं निचे- १. बनारस गंगा आरती, राजेंद्रप्रसाद घाट, दशाश्वमेध घाट, वाराणसी, उत्तरप्रदेश  २. श्री विश्वनाथ आरती, वाराणसी, उत्तरप्रदेश  ३. माँ अन्नपूर्णा आरती, वाराणसी, उतरप्रदेश  ४. दक्षिणेश्वर काली बाड़ी आरती, कोलकाता, पश्चिम बंगाल  ५. कालीघाट मंदिर आरती, कोलकाता, पश्चिम बंगाल  ७. रानी रासमणि परिवार की दुर्गापूजा आरती, कोलकाता, पश्चिम बंगाल  ८. श्री सिद्धि विनायक आरती, मुंबई, महाराष्ट्र  ९. श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई गणपति आरती, पूणा, महाराष्ट्र  १०. महालक्ष्मी मंदिर आरती, कोल्हापुर, महाराष्ट्र  ११. द्वारिकाधीश मंदिर आरती,  द्वारका, गुजरात  १२. सोमनाथ मंदिर आरती, वेरावल, सौराष्ट्र गुजरात १३. श्री गोविन्द देवजी मंदिर, जयपुर, राजस्थान  १४. श्री बांके बिहारी मंदिर, वृन्दावन, उत्तरप्रदेश  १५. श्री राधारमण मंदिर, वृन्दावन, उत्तरप्रदेश  ...

क्यों करते हैं पूजा के बाद आरती? अगर नहीं जानते तो जान ले इसके कारण [Why do the aarti after worship]

चित्र
वैसे तो हम रोज घर पे पूजा करते हैं और साथ में आरती भी करते ही है| पर कभी अपने सोचा है की रोज आरती करने का क्या क्या फायदा हमारे रोज के दिनचर्या पर पड़ता है| पूजा चाहे छोटा हो या बड़ा हो आरती के बिना उस पूजा को सम्पूर्ण नहीं माना जाता है, पर आरती करने के कारण हम में से बहुत काम लोगों को ही पता है| आइये आज जानते हैं आरती करने के कुछ कारण- आरती में घी, सरसो का तेल. टिल का तेल इस्तेमाल किया जाता है जो की पूरी तरह से प्राकृतिक होती हैं और आसानी से मिल भी जाती है| घी गाय के दूध से बना हुआ होता है जब इसे रुई की बाती से जलाई जाती हैं तो घी और प्राकृतिक तेल से एक बहुत ही अच्छी खुशबू आती है| साथ में आरती के लिए धूप भी जताई जाती हैं धुनुची धूप जिसे कहते हैं| पीतल के धुनुची में जब आप धूप जलता हैं राल यानि धूना और गुग्गुल के साथ तो उसका सुगंध चारो ओर फैल जाता है जो एक आध्यात्मिक बातावरण बन जाता है| धूप के सुगंध हमें पूजा में एकाग्र होने में ओर मन को शांत रखने में मदत करता हैं| धूप दीप की यह सुगंध हमारे मन से ओर साथ ही घर में साडी नकारात्मक भावना ओर ऊर्जा को बाहर निकलता हैं ओर साथ ही मन में ओर...

आरती दीये के लिए रुई की बाती [Cotton wick for Aarti diya]

चित्र
आरती के लिए हमेशा ही रुई की बाती चाहिए होती है जो की आजकल बाजार में भी आसानी से मिल जाती है पर अगर आप घर पे बाती बनाएंगे तो आपके दीये के लिए सबसे ज्यादा सही होता है| वैसे तो बाती दो तरह के होते हैं एक लम्बेवाले बाती जो अक्सर तेल के दीये में इस्तेमाल होता है और एक आरती के दीये के लिए घी वाली बाती| वैसे घी के लिए बाती जो बनाए जाते हैं वो आप तेल से भी इस्तेमाल कर सकते हैं| सबसे पहले बाजार से सही और अच्छी रुई लेकर आइए जो की आपको किसी भी पूजा भंडार में मिल सकता है| रुई को लम्बे मात्रा में ले लें और अपने दोनों हतेली से उसे पकाके यानि मोड़के अच्छे से लम्बेवाली बाती बना लें| अब आरती दीये के लिए बाती बनाना है तो पहले पर्याप्त मात्रा में रुई ले लें और फिर उसे पुरा गोलाकार में फैला ले जैसे मोदक बनाते समय हम आटे को गोलाकार में फैलते हैं अब उसे मोदक की आकार में  ही अच्छे से मोड़के के जोड़ दे और ऐसे ही दूसरे आरती के बाती बना ले| बाती दीये के प्रकार के हिसाब से छोटे या बड़े बनाया जा सकता है| अगर आप एक साथ बहुत ज्यादा बाती बनाके रखेंगे तो यह आपके पूजा के समय अलग से बनाने की जरुरत नहीं होती| वैसे...

गुरुवार की लक्ष्मीनारायण पूजा आरती [ Lakshminarayan Puja Aarti ]

चित्र
गुरुवार हम हर घर पे ही लक्ष्मीनारायण की पूजा आरती करते हैं और साथ में आरती भी| आइये जान लेते हैं कि किस तरह से घरपे सहज तरीके से करें श्री लक्ष्मीनारायण जी की आरती पूजा| सबसे पहले अगर आपके घर पे लक्ष्मीनारायण की मूर्ति हैं तो आप उनमे ही पूजा आरती कर सकते हैं पर अगर आपके घर मूर्ति प्रतिष्ठित नहीं है तो आप लक्ष्मीनारायण की छवि में भी आरती कर सकते हैं| एक चौकी या घरपे एक छोटा सा मंदिर बना ले जो जहा पर आप मूर्ति या छवि रखकर आरती कर सकते हैं| लक्ष्मीनारायण पूजा वैष्णव मत में भी की जाती है इसलिए मंदिर या चौकी पर पीला कपड़ा ही बिछाय नाकि लाल या किसी और रंग का कपड़ा| पूजा में भी पिले रंग का फूल ही इस्तेमाल करें| चौकी और मंदिर में रखे मूर्ति या छवि को अच्छे से फूल से सजाय और माला भी पहनाए| आप पूजा के लिए एक पुष्पपात्र यानि थाली में चन्दन, फूल, अक्षत, तुलसीदल रख ले अगर आपको कमल का फूल मिलता है तो वह भी आप थाली में जरूर रखें| अब घट स्थापना करें, घाट स्थापना के लिए एक पीतल या ताम्बे की कलश को जलपूर्ण कर ले और उसमे सिंदूर से स्वस्तिक का चिन्ह बनाय और आम के पत्ते नारियल से घट को सही जगह पर रखे| ...